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Wednesday, 16 May 2012

वो लहर हूँ में


वो लहर 




वो  सागर के साथ बहती है..
वो  किनारे को भी छुती  है.. 
पर न सागर उसे चाहता है ..
ना ही किनारा चाहता  है..
पर दोनों के लिए बार बार बनती बिगडती  हूँ  में 
वो लहर हूँ में .........

किनारे को भी खुश देखना चाहती हूँ ..
सागर को भी खुश रखना चाहती हूँ ..
ओऱो को भी खुश रखना चाहती हूँ ,,
पर फिर सबसे ज्यादा  मतलबी हूँ  में ..
वो लहर हूँ  में ............


    सागर कहता तू किनारे की है ..
    तभी तो  बार बार वहाँ  जाती है ..
    किनारा कहता तू सागर की है ..
    मेरे पास तो बस नाम के लिए आती है ..
    न जाने कितनी कमिनी हूँ में ..
    वो लहर हूँ में............

    जिसका दर्द न सागर ने  जाना .. 
    ना कभी  किनारे ने माना  ..
    कर दिया पल भर में अंजाना ..
    बस रोती रही तड़पती रही हूँ में .. 
    वो लहर हूँ  में ........................
    वो लहर हूँ  में ........................