छोटा सा था सफ़र
जिसमे मिला न हमसफ़र
तड़प उठती है आज यादे
जब याद आती है बीती बातें
सोचा न था की कोई ऐसा होगा
सामने प्यार और पीछे धोखा होगा....
क्या क्या न किया सबके लिए
क्या धोखा मिले इसलिए
न आज तक किसी ने समझा मुझे
न जाना किसी ने मुझे
जब भी पीछे मुढ़ के देखा
हमेशा अपने साया ही देखा
छोटा सा था सफ़र
जिसमे मिला न कोई हमसफ़र
जब काम होता आते सब पास
जब ख़तम होता तो कहते अब बस
इस भीड़ में अकेली ही पाया खुद को
अज तक समझा न पाई खुद को...........
इसे लोगो से कहूँ
या बस उनकी बातें सहु
समझ न आता यह खेल
लोगो का यह अनचाहा मेल..
zindagi ke ek kadwe sach ko ubhara hai..... जब काम होता आते सब पास
ReplyDeleteजब ख़तम होता तो कहते अब बस
bht sahi baat kahi...
gud jyoti keep it up...
thodi or maturity chahiye writing me