यह शब्द कहने को तो बहुत आसान है परन्तु इस शब्द को असल ज़िन्दगी में सार्थक करने में सदिया बीत जाती है पर तब भी पहचान धुंधली सी नजर आती है...नई पहचान बनाने के लिए बहुत मेहनत और सामर्थ की जरुरत पढ़ती है.हर कोई चाहता है उसकी इस दुनिया में कोई न कोई पहचान तो जरुर हो..पर हर कोई वह मुकाम हासिल कर पाए यह जरुरी तो नहीं है .. पर पूरी ज़िन्दगी इसे पाने की चाह जरुर करता है.. और इसी बात को सोच कर मैने भी अपने ब्लॉग को यह नाम दिया है शायद मुझे और मेरे इस ब्लॉग को नई पहचान मिल सके...हलाकि यह काफी मुश्किल है पर नामुमकिन नही है..वेसे ण तो कोई एक अच्छी लेखक हूँ और न ही कोई पत्रकार .. परन्तु लिखने की कोशिश जरुर करुँगी .. क्या पता किसी को पसंद आ जाये..... और यहीं से मुझे भी नई पहचान मिल जाये ...........